शहीद भगत सिंह की 119वीं जयंती पर घड़ी चौक में किया गया स्मरण

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वक्ताओं ने कहा—भगत सिंह के समानता, भाईचारे और शोषणमुक्त समाज के विचार आज भी जीवित

गतिमान एक्सप्रेस 24 न्यूज/गिरधर कुमार/अम्बिकापुर/सरगुजा:-

शहीद-ए-आजम भगत सिंह की 119वीं जयंती के अवसर पर घड़ी चौक, अंबिकापुर में आयोजित कार्यक्रम में उन्हें याद किया गया। कार्यक्रम में शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, प्रबुद्ध नागरिकों एवं युवाओं ने उपस्थित होकर भगत सिंह के विचारों, संघर्ष और उनके सपनों के भारत को याद किया।

वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह के विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं। उनका सपना केवल अंग्रेजी शासन से मुक्ति तक सीमित नहीं था, बल्कि वे एक ऐसे समाज की कल्पना करते थे जिसमें समानता हो और मनुष्य द्वारा मनुष्य का शोषण न हो। वे राजनीतिक आजादी के साथ सामाजिक और आर्थिक बराबरी को भी आवश्यक मानते थे।

कार्यक्रम में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा केंद्रीय असेंबली में बम फेंके जाने की ऐतिहासिक घटना का भी उल्लेख किया गया। वक्ताओं ने कहा कि इस कार्रवाई का उद्देश्य किसी की जान लेना नहीं था, बल्कि बहरी ब्रिटिश हुकूमत तक अपनी आवाज पहुंचाना था। यह विरोध मजदूरों के अधिकारों और नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने वाले दमनकारी कानूनों के खिलाफ भी था।

इस अवसर पर जेल में भगत सिंह से जुड़ा एक प्रसंग भी याद किया गया। बताया गया कि गदर आंदोलन के वरिष्ठ क्रांतिकारी सोहन सिंह भकना ने जेल में भगत सिंह से पूछा था कि “क्या आपके रिश्तेदार आपसे मिलने आएंगे?” इस पर भगत सिंह ने अपने वैचारिक रिश्तों की बात करते हुए कहा था कि करतार सिंह सराभा और खुदीराम बोस जैसे शहीदों से उनका खून का रिश्ता है, जिन्होंने जनता के लिए अपना खून बहाया। सोहन सिंह भकना जैसे क्रांतिकारी उनके वे रिश्तेदार हैं, जिनसे उनकी पीढ़ी ने प्रेरणा ली और आने वाली पीढ़ियां उनकी रिश्तेदार होंगी, जो उनके विचारों को आगे लेकर जाएंगी।

जितेंद्र सिंह ने भगत सिंह को सामाजिक सौहार्द, समानता और भाईचारे का प्रबल समर्थक बताते हुए कहा कि भगत सिंह की दृष्टि में स्वतंत्रता का अर्थ केवल अंग्रेजों का भारत छोड़ देना नहीं था। वे ऐसी आजादी के प्रति भी सचेत करते थे जिसमें सत्ता गोरे शासकों के हाथों से निकलकर भारतीय शासक वर्ग के हाथों में आ जाए, लेकिन आम जनता के जीवन और परिस्थितियों में कोई वास्तविक बदलाव न आए।

फादर थियोडोर ने कहा कि भगत सिंह को पुस्तकों से गहरा लगाव था। बहुत कम उम्र में ही उन्होंने व्यापक अध्ययन के माध्यम से असाधारण वैचारिक समझ विकसित कर ली थी। मात्र 23 वर्ष की आयु में उन्होंने देश और जनता के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। उन्होंने कहा कि भगत सिंह ऐसी पूंजीवादी व्यवस्था के आलोचक थे जिसमें संसाधनों पर कुछ लोगों का नियंत्रण हो और आम आदमी के श्रम का शोषण कर मुनाफे को सर्वोपरि रखा जाए।

डॉ. आशा शर्मा ने भगत सिंह के साथ सुखदेव, राजगुरु, अशफाक उल्ला खां तथा स्वतंत्रता आंदोलन के अन्य क्रांतिकारियों को याद करते हुए उनके संघर्ष और बलिदान को नमन किया।

वक्ताओं ने कहा कि भगत सिंह को याद करने का वास्तविक अर्थ केवल उनके बलिदान को याद करना नहीं, बल्कि उनके विचारों को समझना और समानता, सामाजिक सद्भाव, वैज्ञानिक दृष्टिकोण तथा शोषणमुक्त समाज के उनके सपने को नई पीढ़ी तक पहुंचाना है।

कार्यक्रम का आयोजन शहीद भगत सिंह अकादमी, भारतीय जन नाट्य संघ (इप्टा) एवं सर्व समाज एकता मंच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। कार्यक्रम में अनेक सामाजिक कार्यकर्ता, नागरिक एवं युवा उपस्थित रहे।

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Author: gatimanexpress24news

गिरधर कुमार(मुख्य संपादक) गतिमान एक्सप्रेस 24 न्यूज, नवभारत संवाददाता रघुनाथपुर सरगुजा, ब्यूरो चीफ सरगुजा:-सरगुजा संदेश मोबाइल नंबर:-6261256553 ई मेल-kumargirdhar8@gmail.com

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